सोने की चिड़िया फेडरेशन ने शामली में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को देय रु 1180 करोड़ के मिलों पर ब्याज़ माफ़ी के आदेश का विरोध करने के लिए विशाल जन सभा का आयोजन किया

राष्ट्रीय प्रेस विज्ञप्तिभारत में तुरंत वितरण के लिए [Word version | English]

05 नवम्बर 2016

सोने की चिड़िया फेडरेशन ने शामली में विशाल जन सभा आयोजित करके यह मांग की कि यू पी सरकार अपना मिलों पर रु 1180 करोड़  के ब्याज़ माफ़ी का आदेश वापस ले जिससे किसानों का जरूरी ब्याज़ का पैसा उन्हें मिल सके। मुख्य संयोजक , श्री आलोक कुमार ने इस सभा का संयोजन किया जिसमें सैंकड़ो किसानों ने हिस्सा लिया ।

गन्ना नियंत्रण अधिनियम, 1966 के तहत यदि गन्ने के भुगतान में 14 दिनों से ज्यादा की देरी होती है तब 15 प्रतिशत ब्याज़ का प्रावधान किया गया है। दुर्भाग्यवश किसानों का भुगतान हमेशा बकाया रहता है और उन्हें तय ब्याज़ भी कभी नहीं मिलता। मुख्य मंत्री अखिलेश यादव और उनकी कैबिनेट ने किसानों को दिया जाने वाला उनके ब्याज़ का रु 1180 करोड़ मिलों पर माफ़ करके पक्षपात किया है(जिसमें रु 500 करोड़ ब्याज़ पिछले से पिछले साल के और रु 680 करोड़ पार साल के ब्याज़ के बकाया हैं)जबकि दूसरी ओर, मिल किसानों को फसल के लिए जो यूरिया देते हैं, पिराई सत्र के शुरू होते ही पहली पर्ची पर ब्याज़ मूल के साथ काट लेते हैं । जब किसान अपने बकाया भुगतान को मांगते हैं तब सरकार मिलों का पक्षपात करती है ।

सोने की चिड़िया फेडरेशन जोकि पीड़ितों के कारणों को उठाता है, इस भेदभाव पूर्ण आदेश से चिंतित है। किसान जिसकी औसतन प्रति माह आय रु 3000 है, इस सरकार के आदेश से बुरी तरह से प्रभावित हैं।

रैली के दौरान, श्री आलोक कुमार ने मुख्य मंत्री से मिलों पर ब्याज़ माफ़ी के निर्णय को दस दिन के भीतर वापस लेने और बची हुई कुछ मिलों का बकाया भुगतान कराने को कहा  जिसके मान्य नहीं करने पर किसान पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण आंदोलन को छेड़ देंगे । अपने भुगतान का पैसा लेने के लिए ऐसा प्रतीत होता है कि किसान के पास केवल आंदोलन और प्रदर्शन के अलावा ओर कोई विकल्प बचता भी नहीं है। यदि किसानों को शोषित करके उन्हें और गरीब बनाया जायेगा तो भारत सोने की चिड़िया कैसे बन सकेगा। खेती करना पहले ही घाटे का सौदा है। मिलों पर किसान के ब्याज़ माफ़ी के आदेश तो किसानों की कमर तोड़ रहे हैं।

श्री आलोक कुमार ने बताया की गन्ना उधोग में बहुतसी अन्य समस्याएं हैं। यह जरूरी हो जाता है कि गन्ना उद्योग सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराया जाये जिससे की मिलों को अपनी चीनी और शीरे की काफी ऊँची कीमतें बाज़ार से मिल सके। जिससे किसानों को भी अच्छी कीमतों से लाभ हो सके।  यदि प्रतिबंधक कानून हटाये जाते हैं तो मिलों को बाज़ार से समय से पैसा मिलेगा जिससे वे किसान को तुरंत भुगतान करने में सक्षम हो सकते हैं।

सोने की चिड़िया फेडरेशन(SKCF) का विश्वास है कि कृषि क्षेत्र में मूलभूत सुधार करने का समय आ गया है। उक्त सुधार सोने की चिड़िया टोटल रिफार्म एजेंडा में विस्तार से फेडरेशन की वेबसाइट http://sonekichidiya.in/ पर दिए गए हैं ।

संपादकों के लिए नोट

SKCF एक चैरिटेबल संस्था है जोकि बहुत से सामाजिक कार्य करती है  और ऐसे क्रिया कलाप का समर्थन करती है जिसमें किसानों का  और शोषित वर्गों का समर्थन है।

संपर्क करें:

आलोक कुमार सिंह (ग़ाज़ियाबाद), मुख्य संयोजक, +91 9999755334

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